जानिये, क्या करते हैं रामनाथ कोविंद के भाई ?

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जानिये, क्या करते हैं रामनाथ कोविंद के भाई ?

ये है न्यूज़ ऑफ़ माय इंडिया !!

उत्तरप्रदेश, एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के भाई आज भी परचून की दूकान चलाते हैं, ये बहुत कम लोग जानते हैं कि रामनाथ कोविंद के भाई भाई प्यारेलाल झींझक कस्बे में छोटी से दूकान चलाते हैं, इससे ही उनका घर चलता है। भाइयों में सबसे छोटे रामनाथ कोविंद ने कभी भी अपनी राजनीतिक पकड़ का गलत इस्तेमाल नहीं किया बल्कि राजयसभा सांसद रहते हुए 2010-11 में अपनी सांसद निधि से परौख गांव के पैतृक घर को मिलन केंद्र बनवा दिया।

कोविंद के भाई भी है सरल व सहज
आलम ऐसा है कि आज भी उनके भाई अपनी मेहनत से ही गुजारा करते हैं, आज भी लोग उनसे उनके भाई के राष्ट्रपति पद के लिए की गयी उम्मीदवारी के लिए सवाल पूछते हैं मगर वो जवाब में यही कहते हैं कि उन्हें उनके भाई पर गर्व है और रामनाथ जो भी करेंगे वो समाज की भलाई के लिए ही करेंगे। अपने पैतृक गाँव को लेकर भी वो रामनाथ कोविंद के विशेष लगाव को बताने से नहीं चूकते।

कोविंद के मित्र की जुबानी रामनाथ की सादगी की कहानी
एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के एक बहुत पुराने मित्र हैं पीएन दीक्षित, जो कोविंद को बहुत सालों से जानते हैं। दीक्षित कोविंद के पुराने दिनों की बात कहते हुए बताते हैं कि 1994 में सांसद बनने के बाद रामनाथ कल्याणपुर में किराए का घर ढूंढ रहे थे जब उनकी मुलाक़ात हुई। फिर ये मुलाकात धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदल गयी, दीक्षित बताते हैं – वह किसी आम आदमी की तरह आए और पूरी विनम्रता से घर किराए पर मांगा, उनकी सरलता और सादगी देखकर हमारा पूरा परिवार इसके लिए राज़ी हो गया और फिर वो परिवार के हर सदस्य के साथ जुड़ गए। एक किस्सा सुनाते हुए कोविंद के मित्र दीक्षित बताते हैं – जब वो सांसद बने तो जिला प्रशासन की तरफ से उन्हें खटारा कार भेजी जाती थी, लेकिन कोविंद ने कभी इसे लेकर कोई नाराज़गी नहीं जताई और दलितों के उठान को लेकर चुपचाप काम करते रहे। करीब १०-११ सालों तक कोविंद दीक्षित के ईसिस घर में रहे।

आरएसएस की शाखा में भी कोविंद काफी सक्रीय रहे और दलितों को संघ से जोड़ने में भी उनकी भूमिका इस क्षेत्र में याद की जाती है। आज भले ही उनके भाई सादा जीवन जी रहे हो लेकिन, वो रामनाथ कोविंद के बारें में बताते हुए सादा जीवन उच्च विचार की कहावत को चरितार्थ करते हैं।

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