राहुल गांधी बने गठबंधन के नेता !

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नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की बढ़ती हुई कीमतों को लेकर विपक्ष के पॉपुलर फेस राहुल गांधी छाए हुए है.उन्होंने दिल्ली के राजघाट से गठबंधन का नेतृत्व किया.यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी संयुक्त विपक्ष के धरने में कुछ देर के लिए जरूर आईं लेकिन उन्होंने किसी भी चीज़ में आगे नहीं आयी.उन्होंने पूरी तरह राहुल गांधी को पार्टी की कमान सोप दी है.इससे पहले सोनिआ गांधी ही सभी बैठक की कमान संभालती थी.और सपा और बसपा का समर्थन कांग्रेस को हमेशा से मिला है.और इस बार भी ऐसा ही हुआ.मंच से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाषण दिया और नेतृत्व के रूप में स्थापित किया.

विपक्षी गठबंधन में अगर ममता बनर्जी और शरद पवार को छोड़ दे तो अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव उन्हें राहुल के नेतृत्व को लेकर कोंग्रेसियों को कोई दिक्कत नहीं और गढ़बंधन के साथ कांग्रेस चुनाव लड़ सकती है.यही वजह है की कि सोनिया गांधी धीरे-धीरे ही सही लेकिन राहुल गांधी को गठबंधन की राजनीति में सक्रिय कर रही है.पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों के खिलाफ संयुक्त विपक्ष के कार्यक्रम के नेतृत्व का मौका देकर राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता को न सिर्फ स्वीकार्य बनाने की कोशिश सोनिया गांधी ने की बल्कि इससे आने वाले दिनों में उन्हें गठबंधन के चेहरे के तौर पर पेश करने में और आगामी चुनावी लड़ने में बहुत मदद मिलेगी.अब देखने वाली बात यह रहेगी की राहुल गांधी चुनाव में कितने सक्रिय रहते है.

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