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बिहार – बुधवार शाम बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजे घोषित किये गए, NEET टॉपर रही कल्पना कुमारी ने बिहार बोर्ड के 12वीं के विज्ञान संकाय में भी टॉप किया और उसे 434 अंक प्राप्त हुए.

कल्पना कुमारी के बिहार बोर्ड के विज्ञान संकाय में टॉप करने की घोषणा के तुरंत बाद एक बड़ा विवाद शुरू हो गया, यह विवाद कल्पना के ज्ञान को लेकर नहीं बल्कि बिहार बोर्ड और शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ. आम तौर पर सभी विद्यालयों में परीक्षा में बेठने के लिए न्यूनतम 75 % उपस्तिथि होना अनिवार्य है

विवाद का कारन यह रहा कि बिहार बोर्ड ने इस बार एक ऐसी छात्रा को विज्ञान संकाय का टॉपर बना दिया, जिसने कभी अपने स्कूल में क्लास का मुंह तक नहीं देखा.नीट मे टॉप करने वाली कल्पना ने कई जगह इंटरव्यू में यह बताया की वह पिछले दो साल से दिल्ली में मेडिकल की तेयार  कर  रही थी  इसी दौरान बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा देने के लिए कल्पना ने अपने गृह जिला शिवहर के तरियानी में स्थित YKJM कॉलेज में दाखिला भी लिया हुुआ था.

12वीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए कल्पना ने इसी कॉलेज से बिहार बोर्ड का फॉर्म भरा था. इस परीक्षा के विज्ञान संकाय में वह टॉप कर गईं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब कल्पना पिछले 2 सालों से दिल्ली में आकाश इंस्टिट्यूट से मेडिकल की तैयारी कर रही थी, तो फिर वह शिवहर के कॉलेज के क्लास में न्यूनतम उपस्थिति कैसे दर्ज करा रही थी?

इस पूरे मामले को लेकर विवाद बढ़ा तो बिहार बोर्ड के ऊपर सवाल उठने लगे, विवाद को बढ़ता देख बिहार स्कूल परीक्षा समिति के चेयरमैन आनंद किशोर ने एक झूठ बोला और इस पूरे विवाद को खत्म करने की कोशिश की.इस पुरे विवाद से यह साफ़ है की कल्पना फर्जी छात्रा नहीं है बल्कि बिहार बोर्ड की घटिया शिक्षा व्यवस्था है .

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