इस मंदिर में रावण ने किया था तप, अपने आप निकलता है गायों का दूध

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!!ये है न्यूज़ ऑफ़ माय इंडिया!!

गाजियाबाद। देश की राजधानी से सटे गाज़ियाबाद का दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर इतिहास से भरा हुआ है। इसकी वजह से हमेशा से यहां पर बड़ी संख्या में लोग देश और विदेश से भगवान दूधेश्वरनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंचते है। पत्रिका अपनी अजब गजब की सीरीज में आज इस मंदिर की विशेषताओं के बारे में अपने पाठकों को कुछ रोचक जानकारी से अवगत करा रही है।

प्राचीन दूधेश्वरनाथ मंदिर को लेकर माना जाता है कि लंकापति रावण के पिता विश्वा ने यहां कठोर तप किया था। पुराने समय में यहां बिसरख से लेकर हिंडन तक सीधी गुफा थी। जिन्हें वक्त के साथ अब बंद कर दिया गया है। पुराणों में हरनंदी (हिरण्यदा) नदी के किनारे हिरण्यगर्भ ज्योतिर्लिंग का वर्णन मिलता है, जहां पुलस्त्य के पुत्र एवं रावण के पिता विश्वश्रवा ने घोर तपस्या की थी। रावण ने भी यहां पूजा-अर्चना की थी। कालांतर में हरनंदी नदी का नाम हिंडन हो गया और हिरण्यगर्भ ज्योतिर्लिंग ही दूधेश्वर महादेव मठ मंदिर में जमीन से साढ़े तीन फीट नीचे स्थापित स्वयंभू दिव्य शिवलिंग है।

महंत बताते हैं कि करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पूर्व औरंगजेब के काल में मराठा के वीर छत्रपति शिवाजी अपने लाव लश्कर के साथ दूधेश्व? नाथ थ मंदिर आए थे और उन्होंने यहां पर हवन करने के लिए हवन कुंड भी बनवाया था, जो आज भी मंदिर परिसर में बने वेद विद्यापीठ में स्थित है।

मंदिर के लिखित इतिहास के अनुसार दूधेश्वरनाथ शिवलिंग का प्राकट्य 3 नवंबर 1454 को माना गया है। मंदिर महंत नारायण गिरि बताते हैं कि निकटवर्ती गांव कैला के एक टीले पर शिवलिंग की उत्पत्ति हुई। इस टीले पर गांव की गायें रोजाना एक निश्चित स्थान पर पहुंचती और उनके थनों से स्वत: दूध टपकने लगता था। एक दिन गांव वालों ने गायों का पीछा किया और देखा कि निश्चित स्थान पर गायों का दूध स्वयं टपकने लगा है, तब उन्होंने उस जगह की खुदाई की और खुदाई करते-करते वहां गहरा कुंआ बन गया जिसमें शिवलिंग निकला और तब इस मंदिर को दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर के रूप में स्थापित किया गया।

मंदिर के मंहत नारायण गिरी ने बताया कि प्राचीन शिव मंदिर की मान्यता की वजह से हर सोमवार को यहां श्रृद्धालुओं का जमावड़ा लगता है। इसके अलावा शिवरात्रि के पर्व पर लाखों की तादात में शिव भक्त आते हैं। मंदिर में विश्वास रखने वालों का भी मानना है कि यहां आने पर भगवान ने उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी की हैं।

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