कल्पना चावला की मौत से दुखी हुई मां तो अवनी ने पायलट बन दिखाया

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फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. उन्होंने मिग-21 बाइसन को अकेले ही उड़ाया. इस तरह की यह उनकी पहली उड़ान थी. मूलतः मध्य प्रदेश के रीवा की रहने वाली अवनी के बारे में बताया जाता है कि वो बचपन से ही पायलट बनना चाहती थी.

एक इंटरव्यू में अवनी ने बताया कि, “जब मैं छोटी थी तब टीवी पर कल्पना चावला की स्पेसशिप क्रैश में मौत की खबर देखी थी. इस खबर से मेरी मां सविता चतुर्वेदी बेहद दुखी हुई थी. वो रोने लगी. मुझसे देखा नहीं गया तो मैंने उन्हें कहा कि मैं एक दिन कल्पना चावला बनकर दिखाउंगी. बस उस दिन से मैंने ठान लिया कि पायलट बनूंगी.”

बता दें कि वायुसेना के अधिकारी के मुताबिक, अवनी ने विमान सोमवार को जामनगर वायुसेना स्टेशन से उड़ाया. लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए तीन महिला पायलटों अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना सिंह को कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है.

उन्हें जुलाई 2016 में फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर शामिल किया गया था. हालांकि, इन तीनों के बाद फ्लाइंग ऑफिसर प्रतिभा और शिवांगी को भी इंडियन एयरफोर्स के फाइटर स्ट्रीम फ्लाइंग ब्रांच में मान्यता दी गई है.

वायुसेना के एयर कमांडर प्रशांत दीक्षित ने बताया कि भारतीय वायुसेना और देश के लिए ये एक अनोखी उपलब्धि है. दुनिया में सिर्फ ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल और पाकिस्तान में ही महिलाएं फाइटर पायलट बन सकती हैं.

भारत सरकार ने महिलाओं को 2015 में फाइटर पायलट के लिए अनुमति दी थी. देश में 1991 से ही महिलाएं हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था.

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