मौत को मात देकर हिमालय की 400 फिट ऊंची पहाड़ियों से ऐसे शहद निकालता यह शख्स

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ये है न्यूज़ ऑफ माय इंडिया!!

इंसान को अगर अपनी जीविका चलाने के लिए मौत से भी लड़ना पड़े तो वह पीछे नही हटता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला नेपाल में जहां मौत को मात देकर अपनी ऊंची ऊंची पहाड़ियों से महज बांस की लड़की के सहारे लटककर शहद निकाला जा रहा है। अगर जरा भी चूक हुई तो मौत निश्चित।

दरअसल नोपल के सद्दी गांव में गुरुंग जनजाति आय के लिए शहद निकालने का काम करती है। शहद के लिए इस जनजाति को सबसे खतरनाक शिकारी माना जाता है, लेकिन अब बढ़ती जरूरत और शहद से कम आय होने की वजह से इस जनजाति के लोगो ने शहद निकालने का काम छोड़कर दूसरे व्यवसाय तलाश लिए है। लेकिन सिद्दी गांव में 54 वर्षीय माऊली दन नाम का शख्स है जो अभी भी मौत से जंग लड़कर ऊंची ऊंची पहाड़ियों से शहद निकालता है।

माऊली हिमालय के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर जाकर शहद निकालते हैं। नेशनल जियॉग्राफी ने ‘मौत को मात देने वाले आखिरी शिकारी’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। यह डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर रेनन ओजटर्के ने तैयार की है। इस दौरान रेनन ने माउली और उनके शिष्य असदन के साथ काफी समय बिताया और उनके साथ जाकर शहद निकालने की फिल्म बनाई।

रेनन बताते हैं कि माउली के शिकार करने का तरीका देखकर उनकी भी सांसे मानो थम सी गई थीं। क्योंकि, माउली ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से सिर्फ बांस की सीढ़ी के सहारे लटककर शहद निकाल लेते हैं। माउली ने जब एवरेस्ट पर 400 फीट की ऊंचाई पर लटककर शहद निकाला तो वे देखते ही रह गए। नीचे का नजारा डरावना था और गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी।

हालांकि, माउली को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे बचपन से ही इसी तरह मौत को मात देते आ रहे हैं। अब पहाड़ों की ऊंचाई नापना उनके लिए बच्चों का खेल जैसा है।माउली बताते हैं कि अब उनकी जनजाति में शहद निकालने वाले सिर्फ दो ही लोग बचे हैं।

एक वे और दूसरा उनका शिष्य असदन है। असदन 40 साल के हैं। पहले इनकी पूरी जनजाति शहद निकालने का ही काम करती थी, लेकिन कम आय के चलते धीरे-धीरे लोग दूसरे व्यवसाय से जुड़ गए।

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