इस स्कूल में शिक्षक नहीं, बच्चो को पांचवी क्लास की लड़की पढ़ाती

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ये है न्यूज़ ऑफ़ माय इंडिया!!
5 साल पहले जिन छात्र-छात्राओं ने अपने गुरुओं से बारहखड़ी और 100 तक की गिनती सीखी आज वो पांचवी कक्षा तक पहुंच गई है, गुरुओं के अभाव में खुद ही पहली से पांचवी तक के छात्र-छात्राओं को अ अनार का, आ आम का और 100 तक की गिनती सिखा रहे हैं। पिछले सप्ताह तक यहां एक अतिथि शिक्षक थे, 18 जुलाई को सहायक अध्यापक को प्रतिनियुक्ति पर अन्य स्कूल भेज दिया, जिससे ये स्कूल अब पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गया। ये हालात है दौलतपुरा क्षेत्र के आंबेडकर वार्ड की प्राथमिक हिंदी स्कूल के।

अंबेडकर वार्ड में 17 जुलाई 2012 को शासकीय हिंदी प्राथमिक स्कूल की शुरुआत हुई थी। यहां पहली कक्षा के 10 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 2 सहायक शिक्षक की नियुक्ति की गई थी। जिसमें 16 जून 2012 को सहायक शिक्षक वत्सला गरुड़ और देवेंद्र चौधरी पढ़ाने आए थे, 21 जनवरी 2013 को दोनों ने एक साथ स्कूल छोड़ दिया। इस बीच 18 जुलाई 2012 को दीपाली माली की नियुक्ति हुई, जो कि 18 जुलाई 2017 तक स्कूल में कार्यरत रही, जिसे अब अगले आदेश तक प्रतिनियुक्ति पर हिंदी-मराठी स्कूल सिंधीपुरा भेज दिया है। 2014 से यहां बतौर अतिथि शिक्षक राहुल चौहान ने सेवा दी, जिसे आगामी माह से वेतन जारी नहीं करने की बात कही गई तो पिछले शुक्रवार से उन्होंने भी स्कूल आना बंद कर दिया। अब यहां ना तो कोई शिक्षक है और न ही अतिथि शिक्षक है।

स्कूल के चारों ओर घर-घर में कच्ची-पक्की शराब बिक्री का काम होता है, ये भी एक कारण है कि यहां कोई भी शिक्षक बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहता, यहां कई बार पालक नशे में छोटी-छोटी बात पर शिक्षकों को दोषी ठहरा कर अभद्रता व मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। शिक्षक विहीन स्कूलों में नियमित विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन भी नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में छात्र-छात्राएं पालकों के दबाव में मस्ती करने के लिए स्कूल पहुंचते हैं तो कुछ जगह स्कूलों में होशियार विद्यार्थी ही अपने जूनियर विद्यार्थियों को शिक्षक बनकर पढ़ा रहे हैं।

 

हालात सिर्फ यही नहीं है, जिले में ऐसे 21 स्कूल हैं, जहां एक भी शिक्षक पढ़ाने के लिए नहीं है। इनमें 9 प्राथमिक और 12 माध्यमिक स्कूल हैं। 89 स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक-एक ही शिक्षक हैं, जिसमें 54 प्राथमिक और 35 माध्यमिक स्कूल हैं, ये भी किसी दिन आते हैं तो किसी दिन अपनी मर्जी से रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर घर लौट जाते हैं।

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